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निगम का साधारण सम्मेलन आज:शांति पैलेस चौराहे का नाम परशुरामजी करने का प्रस्ताव 2001 में गुरु गोविंद सिंहजी के नाम पर हो चुकी स्वीकृति
सिख समाज ने कहा- किसी धर्म से आपत्ति नहीं लेकिन जो प्रस्ताव पास, वह बदला नहीं जा सकता
निगम का बुधवार को साधारण सम्मेलन होने वाला है। इसमें 9 प्रस्ताव रखे गए हैं। तीन तो सड़कों और चौराहे के नामकरण के ही। लेकिन सम्मेलन से पहले ही निगम के जिम्मेदारों की सोच पर सवाल खड़े हो गए हैं। एजेंडे के आठवें प्रस्ताव में शांति पैलेस चौराहे का नाम भगवान परशुराम के नाम से करने संबंध में मेयर इन काउंसिल का ठहराव क्रमांक 91 दिनांक 21.7.2023 रखा गया है, जबकि इसी चौराहे का नाम 2001 में ही गुरु गोविंद सिंहजी के नाम से किया था।
निगम के सम्मेलन में प्रस्ताव आने से पहले ही सवाल खड़े हो गए हैं। 2001 में तत्कालीन निगम अध्यक्ष प्रकाश चित्तौड़ा के मुताबिक शांति पैलेस चौराहे को गुरु गोविंद सिंहजी नाम दिया गया था। अभी कोई प्रस्ताव आया है। इस बारे मैं क्या कह सकता हूं। सिख समाज के प्रतिनिधि और गुरुद्वारा श्री सिंहसभा दूधतलाई के ट्रस्टी ज्ञानीचरण सिंह गिल ने बताया कि 2001 में शांति पैलेस नहीं हुआ करती थी। सिर्फ रोड था और तिराहा था। सिख समाज को महत्व देते हुए उस समय की परिषद ने निगम में यह प्रस्ताव पास किया था कि इस तिराहे का नाम गुरु गोविंद सिंहजी होगा।
इसके बाद जिला योजना समिति से भी यह प्रस्ताव पास किया। हम किसी धर्म के विरोध में नहीं है लेकिन ऐसी जानकारी है कि अगर किसी चौराहे के नाम का प्रस्ताव पास कर दिया है तो उसे बदलना नहीं चाहिए। सिख समुदाय भले ही कम संख्या में हो लेकिन जब गुरु गोविंद सिंहजी के नाम पर चौराहे का नाम रख दिया है तो उसे बदलने की जरूरत नहीं होना चाहिए। हम सभी समाज का आदर करते हैं।
तिवारी ने दिया था प्रस्ताव
2001 में पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने सिख समाज द्वारा दिए अनुरोध पत्र पर यह प्रस्ताव 23 मार्च 2001 को सदन में रखा था। प्रस्ताव यह था कि अर्चना, आकांक्षा परिसर, रिंग रोड तिराहे का नामकरण श्री गोविंद सिंहजी के नाम पर करने एवं सिख पंथ के प्रतीक चिह्न लगाने की अनुमति के संबंध में था। प्रस्ताव का समर्थन तत्कालीन पार्षद आनंद सिंह, अशोक प्रजापत एवं अरुण देशपांडे ने किया था। स्वीकृति निगम अध्यक्ष कलावती यादव ने दी थी। संयोग है कि वर्तमान में भी कलावती यादव ही अध्यक्ष हैं।